Skip to main content

Posts

Showing posts with the label Temple

सुरकंडा देवी मंदिर | Surkanda devi Temple in Hindi

सुरकंडा देवी मंदिर | Surkanda devi Temple in Hindi सुरकंडा देवी मंदिर उतराखण्ड़ राज्य के धनाल्टी में स्थित है । यह मंदिर माता सती को समर्पित एक हिंदु मंदिर है । सुरकंडा देवी का मंदिर माता सती के 51 शक्तिपीठों में से एक है । सुरकुंड पर्वत पर होने के कारण मंदिर को सुरकंडा कहा जाता है । Image Credit : Google सुरकंडा देवी का मंदिर समुद्रतल से तीन हजार मीटर की ऊँचाई पर स्थित है । मंदिर सुरकुंड पर्वत की चोटी पर स्थित है । सुरकंडा देवी का मंदिर चारो ओर से जंगलों और पहाड़ो से घिरा हुआ है । मंदिर परिसर से हिमालय को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है ।  सुरकंडा देवी मंदिर अति प्राचीन है , मंदिर का वर्णन स्कंदपुराण से मिलता है , देवराज इंद्र ने दैत्यों के वध हेतु इसी स्थान पर माता कि पुजा की थी । गंगा दशहरे व नवरात्रि के अवसर पर यहा भव्य मेला लगता है और देवी भक्तों की मनोकामना पुर्ण करती है । मंदिर परिसर में भगवान शिव और हनुमानजी का भी मंदिर स्थित है ।  सुरकंडा मंदिर का इतिहास - Surkanda devi Temple History in Hindi पौराणिक कथा के अनुसार माता सती के पिता प्रजापति दक्ष ने ...

यमुनोत्री मंदिर का इतिहास - History of Yamunotri Temple in Hindi

  Yamunotri Temple -   यमुनोत्री मंदिर छोटे चार धामो में से एक है । यमुनोत्री मंदिर उतराखण्ड़ के उतरकाशी जिले मे 3291 मीटर की ऊंचाई पर गढवाल हिमालय के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है । यह मंदिर देवी यमुना को समर्पित एक हिंदु मंदिर है । मंदिर के समीप कालिंदी पर्वत पर 4421 मीटर की ऊंचाई पर यमुना नदी का उद्गम स्थल स्थित है । मंदिर के पास अनेक जल स्रोत है , जिसमें से एक सुर्यकुण्ड भी है जिसका पानी गरम रहता है । शीतकाल में मंदिर के कपाट बंद कर दिये जाते है , क्योंकी यह स्थान पुर्ण रूप से हिमाछांदित रहता है । Yamunotri History Hindi यमुनोत्री मंदिर का इतिहास - History of Yamunotri Temple in Hindi यमुनोत्री मंदिर का निर्माण गढवाल नरेश प्रतापशाह द्वारा करवाया गया था । भुकम्प के दौरान मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था , जिसके बाद जयपुर की महारानी ने इस मंदिर का पुनः निर्माण करवाया था । मंदिर के गर्भग्रह में देवी की काले संगमरमर की मुर्ति प्रतिष्ठित है । पौराणिक कथा के अनुसार इस स्थान पर असित मुनी का आश्रम था । पुराणो में देवी यमुना को सुर्यदेव की पुत्री बताया गया है । शास्त...

बालेश्वर मंदिर चम्पावत - Baleshwar Temple Champawat in Hindi

उतराखण्ड के चम्पावत मे स्थित बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक हिंदु मंदिर है । यह मंदिर हिंदुओ के पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है । इस मंदिर का इतिहास सैकड़ो वर्ष पुराना है इसलिए 1952 में  भारतीय सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्मारक स्थल घोषित कर दिया गया । मंदिर की देखभाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के कर्मचारियों द्वारा की जाती है । बालेश्वर मंदिर चम्पावत|Baleshwar Temple Champawat in Hindi Image Credit ; Satyam Soni बालेश्वर मंदिर का इतिहास | Baleshwar Temple History in Hindi -  ऐतिहासिक बालेश्वर मंदिर का निर्माण 10 - 12 शताब्दी में चंद राजाओ द्वारा करवाया गया था । मंदिर में उपलब्ध ताम्र पत्रों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण सन् 1272 में करवाया गया था । चंद राजाओ द्वारा निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला अत्यंत सुंदर है ।  मंदिर परिसर में रत्नेश्वर व माता पद्मावती का मंदिर भी स्थित है । मंदिर की वास्तुकला | Temple Architecture - बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक हिंदु मंदिर है । मंदिर परिसर में रत्नेश्वर , चंपादेवी , बाली आदि के मंदिर भी स्थित है । इ...

काशी विश्वनाथ मंदिर कथा और इतिहास - Kashi Vishwanath Temple Story And History

काशी विश्वनाथ मन्दिर हिन्दुओं की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी  वाराणसी में स्थित प्राचीन हिन्दु मंदिरों में से एक है । यह मंदिर भगवान शिव की 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक है ।  गंगा मैया तट पर स्थित इस मंदिर के दर्शन मात्र से ही पापियों के पाप धुल जाते है । वाराणसी का प्राचीन नाम काशी है इसलिए मंदिर को काशी विश्वनाथ कहते है । काशी विश्वनाथ मंदिर कथा और इतिहास - Kashi Vishwanath Temple Story And History  मंदिर का नाम  -  काशी विश्वनाथ मंदिर स्थान              -  वाराणसी , उतरप्रदेश स्थापक          -  महारानी अहिल्याबाई स्थापना वर्ष    -  सन् 1780 Image Source : Google काशी विश्वनाथ मंदिर कथा और इतिहास - Kashi Vishwanath Temple Story And History काशी विश्वनाथ मंदिर का स्थापना काल अज्ञात है । इस पवित्र हिन्दु मंदिर का वर्णन अनेकों शास्त्रों मे आता है , जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है की यह मंदिर अधिपुराना है । इस मंदिर को लेकर अनेक धार्मिक कथाएँ...