काशी विश्वनाथ मन्दिर हिन्दुओं की धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में स्थित प्राचीन हिन्दु मंदिरों में से एक है । यह मंदिर भगवान शिव की 12 ज्योतिर्लिंगो में से एक है ।
गंगा मैया तट पर स्थित इस मंदिर के दर्शन मात्र से ही पापियों के पाप धुल जाते है । वाराणसी का प्राचीन नाम काशी है इसलिए मंदिर को काशी विश्वनाथ कहते है ।
काशी विश्वनाथ मंदिर कथा और इतिहास - Kashi Vishwanath Temple Story And History
मंदिर का नाम - काशी विश्वनाथ मंदिर
स्थान - वाराणसी , उतरप्रदेश
स्थापक - महारानी अहिल्याबाई
स्थापना वर्ष - सन् 1780
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| Image Source : Google |
काशी विश्वनाथ मंदिर कथा और इतिहास - Kashi Vishwanath Temple Story And History
काशी विश्वनाथ मंदिर का स्थापना काल अज्ञात है । इस पवित्र हिन्दु मंदिर का वर्णन अनेकों शास्त्रों मे आता है , जिससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है की यह मंदिर अधिपुराना है । इस मंदिर को लेकर अनेक धार्मिक कथाएँ प्रचलित है ।
काशी विश्वनाथ मंदिर कथा -
इस कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव से पवित्र काशी नगरी मे निवास करने का आग्रह किया । भगवान शिव ने अपने भक्त के सपने में आकर आदेश दिया की जब तुम गंगा मे स्नान करोंगे तब दो शिवलिंगो के दर्शन होंगे , उन दोनों को जोड़कर किसी पवित्र स्थान पर स्थापित करोंगे । जिसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती काशी नगरी में विराजमान हो गये ।
काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास -
काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास हजारो वर्ष पुराना है । माना जाता है की इस मंदिर का जीर्णोध्दार काशी नरेश राजा हरिशचन्द्र ने करवाया था ।
सन् 1194 में विदेशी आक्रांता मुहम्मद गौरी ने तुड़वा दिया था । कुछ समय बाद एक धर्मप्रिय गुजराती व्यापारी ने विश्वनाथ मंदिर का पुन: निर्माण करवाया था । लेकीन एक बार फिर जौनपुर के सुल्तान महमुदशाह के आदेश पर फिर से मंदिर तुड़वा दिया गया ।
सन् 1585 में राजा टोडरमल ने काशी विश्वनाथ मंदिर का पुन: निर्माण करवाया । 1669 में क्रुर बादशाह औरंगजेब ने मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया , मंदिर तोड़ने के बाद वहा पर ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई गई ।
1777-80 में इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया । कहा जाता है की स्वंय भगवान शिव ने महारानी अहिल्याबाई के सपने मे आकर मंदिर के पुन: निर्माण का आदेश दिया था । पंजाब के महाराजा रणजीत सिंह जी ने सोने का क्षत्र चढाया था ।
काशी विश्वनाथ मंदिर के बारे में - About Kashi Vishwanath Temple In Hindi
- मंदिर मे चार द्वार है - शांति द्वार , कला द्वार , प्रतिष्ठा द्वार , निवृति । इन द्वारों का अपना अपना महत्व है ।
- मंदिर के दक्षिण में स्थित द्वार को " अघोर मुख " कहा जाता है , माना जाता है की इसी द्वार से भगवान शिव मंदिर मे प्रवेश करते है ।
- मंदिर का मुख्य द्वार चाँदी का बना हुआ है ।
- मंदिर का क्षत्र सोने का बना हुआ है , यह सोना महाराजा रणजीत सिंह ने चढाया था ।
- विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग दो भागों मे बटाँ हुआ है , दाहिनी भाग में माता सती और दुसरे भाग में भगवान शिव ।
- भगवान विश्वनाथ गुरू और राजा के रूप मे विराजते है , बाबा विश्वनाथ को राजराजेश्वर भी कहते है ।
- मंदिर के गर्भग्रह में गुबंद श्रीयंत्र स्थापित है ।

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