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"मेरा शहर बीमार" - Bimar Shahar Poem In Hindi
वो बुझी बुझी आँखों वाला लड़का ,
जो चौराहे पर मुझे मिला ,
उसी में मुझे बतलाया की ,
मेरा शहर बीमार है |
शहर की नब्ज तेज़ है ,
गलिया गर्माहट उछलती है ,
सच ,
मेरा शहर बीमार है |
याद आता है मुझे
आंगन , गली , चबूतरा
अपना कूदना
चोट , ख़ून , पट्टी और
माँ की डांट
फिर आँखों में उभरते है
भाले , चाकू , फरसे , लाठी ,
बन्दूक , गोली , खून , लाशें और चीखे
सच
मेरा शहर बीमार है |
मुझे उनके नाम की हिचकी आती है
जो शहर के कंधो पर खड़े है ,
उनकी सेहत के लिए जरूरी थे |
कुछ जुलुस / हंगामे
उन्ही की तंदरूस्ती की खातिर
"मेरा शहर आज बीमार है "
See More Poems -
Hindi poem In hindi
"मेरा शहर बीमार" - Bimar Shahar Poem In Hindi
वो बुझी बुझी आँखों वाला लड़का ,
जो चौराहे पर मुझे मिला ,
उसी में मुझे बतलाया की ,
मेरा शहर बीमार है |
शहर की नब्ज तेज़ है ,
गलिया गर्माहट उछलती है ,
सच ,
मेरा शहर बीमार है |
याद आता है मुझे
आंगन , गली , चबूतरा
अपना कूदना
चोट , ख़ून , पट्टी और
माँ की डांट
फिर आँखों में उभरते है
भाले , चाकू , फरसे , लाठी ,
बन्दूक , गोली , खून , लाशें और चीखे
सच
मेरा शहर बीमार है |
मुझे उनके नाम की हिचकी आती है
जो शहर के कंधो पर खड़े है ,
उनकी सेहत के लिए जरूरी थे |
कुछ जुलुस / हंगामे
उन्ही की तंदरूस्ती की खातिर
"मेरा शहर आज बीमार है "
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