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"मेरा शहर बीमार"कविता - Bimar Shahar Poem In Hindi

Hindipoems| "मेरा शहर बीमार" - Bimar Shahar Poem In Hindi  वो बुझी बुझी आँखों वाला लड़का , जो चौराहे पर मुझे मिला , उसी में मुझे बतलाया की , मेरा शहर बीमार है  | शहर की नब्ज तेज़ है  , गलिया गर्माहट उछलती है , सच , मेरा शहर बीमार है  | याद आता है मुझे आंगन , गली , चबूतरा अपना कूदना चोट , ख़ून , पट्टी और माँ की डांट फिर आँखों में उभरते है भाले , चाकू , फरसे , लाठी , बन्दूक , गोली , खून , लाशें और चीखे सच मेरा शहर बीमार है | मुझे उनके नाम की हिचकी आती है जो शहर के कंधो पर खड़े है , उनकी सेहत के लिए जरूरी थे | कुछ जुलुस / हंगामे उन्ही की तंदरूस्ती की खातिर "मेरा शहर आज बीमार है " See More Poems - Hindi poem In hindi

श्रेष्ठ जीवन पर कविता (हिन्दी कविताएँ) - HINDI POEM

हिन्दी कविताएँ  - HINDI POEM  "जगती है  जीवन भरने को ,पर जीवन लुटता जाता  है " जगती है जीवन भरने को ,    पर जीवन लुटता जाता है | जीवन ही जीवन से टकरा, अपनी  सॉँस    मिटाता है |                            🔻  कौन  कहे   जीवन  उनको  ?        जिनको मानवता का भान नहीं,    दानव सा  जीवन  भोग  रहे , मानवता पर अभिमान नहीं  ,     सिसक  रहा    प्रगतिवादी ,  सच्चा    मात    खाता     है, जगती है  जीवन भरने को , पर जीवन लुटता जाता  है |               🔻.  कितनी साँसे तड़प तड़प कर, काल -  ग्रास    बन   जाती    है , कितनी आहें सिसक -सिसककर , अपना   खू...