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श्रेष्ठ जीवन पर कविता (हिन्दी कविताएँ) - HINDI POEM


हिन्दी कविताएँ - HINDI POEM 


"जगती है  जीवन भरने को ,पर जीवन लुटता जाता  है "








जगती है जीवन भरने को ,
  
पर जीवन लुटता जाता है |

जीवन ही जीवन से टकरा,

अपनी  सॉँस    मिटाता है | 

         
              🔻


 कौन  कहे   जीवन  उनको  ? 
     
जिनको मानवता का भान नहीं,
  
दानव सा  जीवन  भोग  रहे ,

मानवता पर अभिमान नहीं  , 
  
सिसक  रहा    प्रगतिवादी , 

सच्चा    मात    खाता     है,

जगती है  जीवन भरने को ,

पर जीवन लुटता जाता  है | 


             🔻. 


कितनी साँसे तड़प तड़प कर,

काल -  ग्रास    बन   जाती    है ,

कितनी आहें सिसक -सिसककर ,

अपना   खून    लुटाती    है ,

इस  दुखयारी  बस्ती पर तो ,

शोषण  पॉँव  जमाता    है ,

जगती है जीवन भरने को ,

पर जीवन लुटता जाता है | 


             🔻 

इस काल में अकाल पड़ा है ,

सुखी  धरती  मानव  भूखा  ,

बचा नहीं  है  पानी - दाना ,

हर एक क्षण लगता है रुखा  , 

आज मृत्यु की बाहों  में तो ,

हर  जीवन  अकुलाता  है ,

जगती है जीवन भरने को ,

पर जीवन लुटता जाता है | 


           🔻

यह  भोली  भोले  भालो की  , 

इसमें  जीवन  कौन  भरेगा  ?

कोण कफ़न सर पर बाँधेगा ? 

हॅसते  हॅसते  मौत  चुनेगा  ,

होगी  क्या  परवाह  उसे  ? 

जो अलख जगाता आता है  | 

जगती है  जीवन  भरने  को  

पर जीवन लुटता जाता  है |




______समाप्त _______




" प्राचीन भारतीय संस्कारों और संस्कृति की तरफ लौटो "


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