पटाखो का इतिहास - दिपावली का पर्व आने के 1 माह पुर्व ही बाजार पटाखों और फुल-जड़ीयों से सज जाते है , दिपावली का त्योहार करोड़ो भारतीयों के आस्था का प्रतीक है , इसी दिन भगवान श्रीराम अयोध्या पधारे थे । दिपावली के दिन पटाखे जलाने की परंपरा है , आपको यह बात जानकर हैरानी होगी की भारत मे पटाखो का व्यापार 10 हजार करोड़ से भी अधिक का है , जाने पटाखों का इतिहास ।
पटाखो का इतिहास(History of firecrackers in Hindi )
पटाखों का अविष्कार -
पटाखो का अविष्कार 9वी से 10वी शताब्दी चीन मे हुआ था , लेकिन इससे जुडी़ 2 कथाये है ।
1. इस कथा के अनुसार चीन के लोग जंगली जानवरो और बुरी आत्माओ को भगाने के लिए बाज को जलाते थे , बाज खोखला होता है और बीच-बीच मे गाँठे होती है । बाज को आग लगाने से एक धमाकेदार आवाज होती , इस आवाज को सुनकर जानवर भाग जाते थे । उस समय चीन मे त्योहारो व आयोजनो मे बाज का उपयोग पटाखे के रूप मे करते थे ।
इन सब को देखते हुए चीन के रसायन शास्त्रियों ने कुछ रसायनो को मिलाकर एक मिश्रण तैयार किया । अब इसके साथ बाज को जलाने से और भी तेज आवाज आती ।
13वीं सदी मे इटालियन यात्री मार्को पोलो चीन से इस मिश्रण के कुछ Sample अपने साथ अपने साथ इटली ले गया , इटली मे इन मिश्रणो पर अनेको प्रकार के शोध किये गये । इसके फलस्वरूप पटाखो के कई रूप सामने आऐ । आधुनिक पटाखो का श्रेय इटली और फ्रांस को ही जाता है ।
2. इस कहानी के अनुसार चीन मे एक बावर्ची मसालेदार खाना बना रहा था । बावर्ची ने गलती से आग मे पोटेशियम नाइट्रेट डाला जिससे जोर से आवाज आई और आग मे रंगबिरंगी लपते देखने को मिली । यह देख कर लोगो की इसके प्रति उत्सुकता बढी और कोयला और सल्फर को आग मे डाला गया जिससे ओर तेज आवाज निकली ।
भारत मे पटाखों का प्रचलन -
भारतीय शास्त्रो के अनुसार भारत मे पटाखों का प्रचलन ईसा पुर्व काल से ही है , कोटिल्य ( चाणक्य ) की पुस्तक अर्थशास्त्र मे एक चुर्ण का वर्णन मिलता है जिसे जलाने पर तेजी से लपटे पैदा होती थी ।इतिहासकारो के अनुसार 12वीं शताब्दी मे बंगाल के बोध्द धर्मगुरू दीपांकर ने भारत मे सर्वप्रथम पटाखों/आतिश का प्रचलन शुरू किया । कहा जाता है की दीपांकर को यह ज्ञान चीन , तिबब्त के
के दौरान प्राप्त हुआ था ।
बहुत से इतिहासकारो का यह भी कहना है की पटाखे मुगलो़ की देन है , लेकीन यह कहना गलत नही होगा की पटाखे मुगलो़ के भारत आगमन से पुर्व भी थे . दारा शिकोह कि शादी की एक पेंटिग मे पटाखे व पटाखे जलाते हुए लोगो को चित्रित किया गया है .
भारत की पटाखा कंपनिया -
भारत मे सर्वप्रथम पटाखा कंपनी कलकत्ता मे शुरू हुई थी .
भारत मे सबसे ज्यादा पटाखों का उत्पादन तमिलनाडु राज्य के शिवकाशी शहर मे होता है . शिवकाशी को Capital of indian firecrackers भी कहा जाता है , क्योकी भारत का 55% पटाखा उत्पादन शिवकाशी से ही होता है .

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