अस्थियों को गंगा मे क्यों प्रवाहित करते है ?
हिंदु मान्यताओं के अनुसार मृत्यु के उपरान्त जीवात्मा का अपने शरीर की भस्म मे मोह रह जाता है । जब तक मृतात्मा की भस्म को पवित्र गंगा मैया मे प्रवाहित नही कर दिया जाता तब तक मृतात्मा को शांति नही मिलती । इसलिए शव को तत्काल दाह कर दिया जाता है और जैसे ही चौथे दिन भस्म हाथ छुने योग्य हो जाती तब उसे पवित्र गंगा मैया मे प्रवाहित कर दिया जाता है ।
इस प्रकार मृतात्मा को विलक्षण आंनद की अनुभव होता है और आत्मा परलोक की और प्रस्थान करती है । पंचाग अस्थियों को धार्मिक भाषा मे " फुल " कहा जाता है
यावदस्थिनी गंगायां तिष्ठन्ति पुरूषस्य च ।
तावद्वष्रसहस्त्राणि ब्रह्मलोके महीयते ।।
अर्थात् - मृतक की अस्थियां जब तक गंगा मे रहती है तब तक मृतात्मा ब्रह्मलोक मे निवास करता हुआ आनन्दोपभोग करता है ।
विज्ञान का मत -
विज्ञान के अनुसार नदियों मे अस्थियां प्रवाहित करने से एक अन्य लाभ भी है । गंगा नदी कैलाश पर्वत से लेकर बंगाल की खाड़ी तक लंबा सफर तय करती है । जो सहस्त्रो वर्गमील भुमी को सींच कर उपजाऊ बनाता है । वह अपनी फॉस्फोरस की क्षमता खो देता है ।
इसमे अस्थियों डालने से अस्थि मे स्थित फॉस्फोरस जल मे घुल जाता है । वह भुमि की उर्वरा शक्ति बनाने मे सहायक सिध्द होता है ।
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