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आदि गुरू शंकराचार्य जी की प्रश्नोत्तरी( Vedant In Hindi )

Vedant Questions and answer



आदि गुरू शंकराचार्य जी की प्रश्नोत्तरी ( Vedants questions and answers ) 


1.प्रश्न - गुलामी की जंजीरो मे कौन जकड़ा है ?

  उत्तर - जो इन्द्रियो का दास है ।

2. प्रश्न - मुक्ति किसे कहते है ?
   उत्तर - सांसारिक प्रदार्थो के प्रति अनासक्ति ही               मुक्ति है ।

3. प्रश्न - घोर नरक क्या है ?
   उत्तर - मानव शरीर ।

4. प्रश्न - स्वर्ग का मार्ग कौनसा है ?
   उत्तर - वासना का विनाश ही स्वर्ग का पथ है ।

5. प्रश्न - नरक का पथ कौनसा है ?
    उत्तर - नारी शरीर

6. प्रश्न - स्वर्ग कैसे मिलता है ?
    उत्तर - अंहिसा से ।

7. प्रश्न - मनुष्य के शत्रु कौन है ?
    उत्तर - मनुष्य की इन्द्रिया ।

8. प्रश्न - निर्धन कौन है ?
    उत्तर - जिनकी वासनाओ का अंत नही ।

9. प्रश्न - धनी कौन है ?
    उत्तर - सदा संतुष्ट रहने वाला ।

10. प्रश्न - अमृत क्या है ?
       उत्तर - वासना विहीन अवस्था ।

11. प्रश्न - बंधन क्या है ?
      उत्तर - अहम भाव ।

12. प्रश्न - अंधा कौन है ?
       उत्तर - विषय लोलुप व्यक्ति

13. प्रश्न - हलाहल विष क्या है ?
      उत्तर - कामुकता

14. प्रश्न - कौन सदा दुखी रहता है ?
      उत्तर - सांसारिक प्रदार्थो के प्रति आसक्ति रखने वाला ।

15. प्रश्न - मनुष्य के लिए अज्ञेय वस्तु कौनसी है ?
      उत्तर - नारी का ह्रदय और उसके कार्य ।

16. प्रश्न - पशु कौन है ?
      उत्तर - अज्ञानी व्यक्ति ।

17. प्रश्न - किसके साथ समागम करना चाहिए ?
      उत्तर - मुर्खो , दुष़्टो , पापियो और संकिर्ण ह्रदयवाले

18. प्रश्न - पतन का मुल कहा है ?
      उत्तर - भिक्षावृति मे ।

19. प्रश्न - महान बनने का साधन क्या है ?
      उतर - किसी से कुछ न मांगना ।

20. प्रश्न - जन्म किसका सार्थक है ?
      उत्तर - जिसका पुन्रजन्म नही होता ।

21. प्रश्न - सबसे प्रबल शत्रु कौन है ?
       उत्तर - काम , क्रोध , मोह , माया और वासना ।

22. प्रश्न - दुखो का कारण क्या है ?
       उत्तर - अपना और पराया का भाव

23. प्रश्न - किसका सदा चिंतन करना चाहिए ?
       उत्तर - जगत मिथ्या , ब्रह्म सत्य

24.  प्रश्न - वास्तविक कर्म क्या है ?
       उत्तर - जिससे भगवान को प्रसन्न किया जा सके ।

25. प्रश्न - नरातम पशु कौन है ?
      उत्तर - जो अपना कर्म नही करते और आत्मज्ञान विहिन है ।
      

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