Skip to main content

काशी के संत हरिहर बाबा

काशी के संत हरिहर बाबा -

संत हरिहर बाबा राम के परम रसिक महात्मा था , बाबा भगवान राम के परमभक्त थे । इन्होने अपना पुर्ण जीवन काशी की घाटों पर ही गुजारा । इनकी कृपा से असंख्य लोगों ने आध्यात्मिक शांति प्राप्त की । जीवन के अंतिमकाल तक काशी के भगवती भागीरथी मे नाव पर निवास किया । बाबा भक्तो की कतार हमेशा लगी रहती थी , बाबा के भक्तो मे स्वंय काशी स्म्राट , मदन मोहन मालवीय आदि थे । बाबा सिध्द और दुरदर्शी संत थे ।


बाबा हरिहर का जन्म और प्रारंभिक जीवन --


बाबा हरिहर का जन्म बिहार के छपरा जिले के जाफरपुर ग्राम मे एक प्रतिष्ठीत ब्राह्मण परिवार मे हुआ था । इनके बचपन का नाम सेनापति तिवारी था । इनके माता-पिता बड़े पवित्र विचारो के थे । देवयोग से सेनापति की अल्पावस्था मे ही उनके माता - पिता का देहान्त हो गया था । सेनापति का मन सहसा भगवान की ओर लग गया । कुछ समय तक सोनपुर और भागलपुर मे विद्याध्ययन किया । इसी समय इनके छोटे भाई हरिहर का देहान्त हो गया । इस घटना ने सेनापति के जीवन को पुर्ण रूप से बदल दिया । अब इनके मन मे वैराग्य का उदय हो गया , सेनापति भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या गये ।


हरिहर बाबा का आध्यात्मिक जीवन --

सरयु के तट पर रहकर इन्होने कठीन तप का जीवन अपनाया , कठोर से कठोर उपवास व्रत मे संग्लन रहकर वे परमात्मा के चिंतन मे निमग्न हो गये ।
अल्पाहार से संतोष कर लेने का स्वभाव बना दिया ।

 काशी दर्शन की उनकी बड़ी इच्छा थी । वे तप करने के लिए बाबा विश्वनाथ की पवित्र धरती काशी आ गये । काशी आने पर भगवती गंगा मे ही नाव पर निवास करने का नियम बना लिया , इस नियम का पालन इन्होने आजीवन किया । उनकी काशी और गंगा के प्रति भक्ति असाधारण कोटि की थी । काशी मे वे हरिहर भैया के नाम से प्रसिध्द हुए । काशी निवास-काल के दौरान उनका सम्पर्क महात्मा वितारागानन्द से हुआ , महात्मा जी के प्रति बडी़ आस्था रखते थे बाबा हरिहर जी ।


हरिहर बाबा शौंच आदि के लिए गंगा के उस पार जाया करते थे । कड़ी से कडी़ गर्मी , भयानक सर्दी और अपार वर्षा का सामना कर वे अपने नियम का पालन करते रहे । कभी कभी तो नाव के अभाव मे तैर कर गंगा पार चले जाते थे । वे असाधारण हठयोगी थे , वे परमहंस थे । संसार के प्रदार्थ और प्राणियो मे उनकी तनिक भी ममता नही रह गयी थी ।


हरिहर बाबा के चमत्कार --

संत का जीवन दिव्य घटनाओ से सम्पन्न होता है । संत हरिहर बाबा के जीवन मे अनेक दिव्य घटनाओ का होना पाया गया है । एक समय की बात है , बाबा के पैर मे नागफनी का काँटा गड़ गया , वे शान्त रहे पर जब उन्होने सुना की महाराज वीतरागानन्द को भी नागफली का काँटा चुभ गया तो उन्होने कहा की "नागफली का काँटा सबको दुख देता है , उसका नष्ट होना ही उचित है " । लगभग दो दिन के पश्चात गंगा के दोनो किनारो पर नागफली का नामो निशान मिट गया । बाबा वाग्सिध्द महात्मा थे , एक शब्द भी व्यर्थ नही बोलते थे ।



राम नाम मे उनकी बड़ी निष्ठा थी । एक बार हरिहर बाबा शौच निवृत हेतु नाव से गंगा के उस पार जा रहे थे । गंगा का जल बाढ पर था , धारा वेगवती थी । नाव डुबने लगी , केवट ने बड़ी कोशिश की लेकीन कुछ फर्क न पड़ा ।  बाबा ने केवट को यत्न करने से मना कर दिया । बाबा के आदेश से लोग राम नाम जपने लगे । देखते ही देखते नाव डुबने से बच गयी । काठ की नाव डुबने से बच गयी ।


हरिहर बाबा का अंतिम समय --

जीवन के अंतिम दिनो मे वे केवल गंगा जलपान ही करते थे । आषाढ शुक्ल पंचमी शुक्रवार को रात मे साढे ग्यारह बजे इस नश्वर शरीर का परित्याग कर परमधाम की यात्रा की ।


हरिहर बाबा से जुड़ी रोचक बातें --

* आपके बचपन का नाम सेनापति था । आपकी जन्मभुमि बिहार थी

*  बाबा अपने जीवन के अंतिमकाल तक काशी मे निवास किया ।

* इन्होने दिगम्बर वेष में गंगा मे खड़े होकर सुर्य से नेत्र मिलाकर लम्बें समय तक तपस्या की ।

* बाबा भगवान राम के परम भक्त थे । इन्होने अपने भक्तो को राम नाम जाप की शिक्षा दी ।

* वे निष्काम और आत्मज्ञानी संत थे ।

* बाबा के भक्तो की सुची मे बड़े बड़े नाम थे , जिसमे मदन मोहन मालवीय और काशी के महाराज भी थे ।

* हरिहर बाबा शौच के लिए गंगा के उस पार जाया करते थे ।



हरिहर बाबा के अनमोल वचन --

* यदि काशी और गंगाजी के बदले स्वर्ग भी मिले तो मंजूर नही ।

* सन्यांसी को कथनी के अनुूरूप कार्य करना चाहिए ।

* अध्यात्म-पथ के पथिको को विघ्न-बाधाओ से नही घबराना चाहिए ।

* प्राणीमात्र को काशीवास , गंगाजल-सेवन , सत्संग और परमात्मा का भजन करना चाहिए । 

Comments

Popular posts from this blog

करमैती बाई का जीवन परिचय ( Karmaiti Bai Biography In Hindi )

करमैती बाई - 

महावीर स्वामी का जीवन परिचय और उपदेश ( Biography Of Mahavir Swami and Updesh )

महावीर स्वामी का जीवन परिचय और उपदेश (Biography Of Mahavir Swami )-- महावीर स्वामी विक्रम संवत के पाँच सौ वर्ष पहले के भारत की बहुत बड़ी ऐतिहासिक आवश्यकता थे । इन्होनें सुख-दुख मे बंधे जीव के लिए शाश्वत दिव्य शान्ति और परम् मोक्ष का विधान किया । महावीर स्वामी जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर थे । जैन धर्म की स्थापना त्रिषभदेव ने की थी । महावीर स्वामी ने इसके विकास मे अहम योगदान दिया था । इन्होने जैन धर्म को पुर्ण तपोमय बना दिया । महावीर स्वामी का प्रारंभिक जीवन -- वैशाली राज्य की सीमा पर गण्डकी नदी के तट पर क्षत्रियकुण्डनपुर नगर के राजा सिध्दार्थ और माता त्रिशला के यहा महावीर स्वामी का जन्म हुआ था । संन्यास से पुर्व इनका नाम वर्धमान था । इनके जन्म से पहले इनकी माता को चौदह विचित्र सपने आये थे । चैत्र मास की शुक्ला त्रयोदशी को सोमवार के उपाकाल मे महावीर स्वामी ने शिशु वर्धमान के नामरूप जन्म लिया । शिशु का का रंग तपे सोने के समान था । शान्ति और कान्ति से शरीर शोभित और गठीत था । माता-पिता ने बड़ी सावधानी से उनका पालन-पोषण किया । रानी त्रिशला अत्यंत गुणवती व सुंदर थी । सिध्दार्थ...

हवा महल का इतिहास और रोचक बातें -Hawa Mahal Jaipur History in Hindi

Hawamahal In Hindi | Hawamahal History In Hindi | unknown facts About Hawamahal Jaipur |  हवामहल राजस्थान के जयपुर में स्थित एक महल/हवेली है | राजस्थान के प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में से हवामहल भी एक है | हवामहल का निर्माण सन 1798 में जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह ने करवाया था | हवामहल 953 झरोखे है | इन झरोखो से ठंडी ठंडी हवा आने के कारण इनका नाम हवामहल पड़ा | यह  महल ज.डी.ऐ रोड , बड़ी चौपड़ जयपुर में स्थित है  स्थापना वर्ष - 1798  स्थापक       -  जयपुर नरेश सवाई प्रताप सिंह  Hawamahal History In Hindi | हवामहल जयपुर का इतिहास |  हवामहल का निर्माण 1798 में जयपुर के महाराजा सवाई प्रताप सिंह जी द्वारा किया गया था | इस महल का निर्माण राजपूत महिलाओ के लिए करवाया गया था ताकि वे शहर में हो रहे सार्वजानिक उत्स्वों और कार्यकर्मो को देख सके | उस समय राजस्थान में पर्दा - प्रथा  प्रचलन था | जिसमे राजपूत महिलाओ को बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती थी | ऐसा भी कहा जाता है की इस महल का निर्माण गर्मी से निजात पाने के लिए बनवाय...