Skip to main content

आदि गुरु शंकराचार्य और चांडाल ( Aadi Guru Shankracharya And Chandal )



आदि गुरु शंकराचार्य जी का अवतरण 8वी सदी में हुआ था | इन्होंने अद्वैत वेदांत का प्रचार किया और हिन्दू धर्म की तरफ लौटने का उपदेश दिया | हिन्दू मान्यताओं के अनुसार आदि गुरु शंकराचार्य को भगवान शिव का अवतार माना जाता है | आदि गुरु ने Geeta , Brahmasutra , Upnishada पर भाष्य लिखा | हिन्दू धर्म की पुर्नरस्थापना का श्रेय Adi Guru Shankracharya Ji को ही जाता है |



आदि गुरु शंकराचार्य और चांडाल


एक दिन जब वे गंगा तट की ओर जा  रहे  थे , सामने  से  एक चांडाल मद्य  के नशे में झूमता चला आ रहा था |उसके साथ चार कुत्ते भी थे | उनसे स्पर्श हो जाने की शंका से श्री शंकराचार्य ने कहा ,--"  रास्ते के एक और  होकर चलो और मेरे जाने के लिए स्थान छोड़ दो " | चांडाल ने उनकी बात सुनी और कहा , --"  कौन किसको स्पर्श करता है ?  सर्वत्र एक ही वस्तु है , उसके अतिरिक्त और क्या है ? किसके स्पर्श से भयभीत होकर तुम दब-दबकर चल रहे हो ? आत्मा को तो कोई स्पर्श नहीं करता | जो आत्मा तुम्हारे भीतर है , वह मेरे भी है | फिर तुम किससे दूर जाने को कह रहे हो ? मेरी देह को या मेरी आत्मा को ?



इन शब्दों को सुनते ही श्री शंकर का ब्रह्मज्ञान सच्चे व्यावहारिक स्तर पर पहुंच गया और उन्होंने मन ही मन उस चांडाल को गुरु समझ कर प्रणाम किया | मान्यता के अनुसार स्वयं भगवान शंकर चांडाल के रूप में आचार्य शंकर को उपदेश देने आये थे |


Read More -


गुरु गोरखनाथ जी




Comments

Popular posts from this blog

करमैती बाई का जीवन परिचय ( Karmaiti Bai Biography In Hindi )

करमैती बाई - 

नाथ संप्रदाय और सिद्ध योगी गुरु गोरखनाथ (Guru Gorkhnath And Nath Sampraday)

गुरु गोरखनाथ भारत के सिद्ध महात्माओ में से एक है | भारत में नाथ संप्रदाय अपनी एक अलग पहचान रखता है | इस संप्रदाय में बड़े बड़े सिद्ध महात्मा हुए जैसे -गोरखनाथ , मत्स्येन्द्र नाथ   गोगाजी , रामदेवजी , राजा भर्तहरि , राजा गोपीचंद,कनीफनाथ,जालंधर , रेवणनाथ , जैसे अनेको सिद्ध हुए | नाथ संप्रदाय में कुल 12 पंथ होते है | इस पंथ में दीक्षा लेने वाले साधक को कठिन तपस्या व गुरु सेवा के बाद गुरु अपनी स्वैच्छा से साधक को दीक्षा देता है | गुरु गोरख नाथ के गुरु मत्स्येन्द्र नाथ को मन जाता है | नाथ संप्रदाय भेदभाव का विरोधी है | नाथ संप्रदाय में कोई भी साधक सन्यास ले सकता है चाहे वो किसी भी वर्ण का हो | नाथ संप्रदाय में कुल १२ पंथ है | इन पंथो की जानकारी में नीचे दे रहा हूँ | सत्यनाथ पंथ   धर्मनाथ पंथ  रामनाथ पंथ   लक्ष्मणनाथ पंथ  कंथड़ पंथ  कपिलानी पंथ  वैराग्य पंथ  मन्नाथ पंथ  आई पंथ  पागल पंथ  ध्वजनाथ पंथ  गंगा नाथ   ऐसा माना जाता है की नाथ संप्रदाय के प्रथम प्रवर्तक स्वयं आदिनाथ ( शिव )...

महावीर स्वामी का जीवन परिचय और उपदेश ( Biography Of Mahavir Swami and Updesh )

महावीर स्वामी का जीवन परिचय और उपदेश (Biography Of Mahavir Swami )-- महावीर स्वामी विक्रम संवत के पाँच सौ वर्ष पहले के भारत की बहुत बड़ी ऐतिहासिक आवश्यकता थे । इन्होनें सुख-दुख मे बंधे जीव के लिए शाश्वत दिव्य शान्ति और परम् मोक्ष का विधान किया । महावीर स्वामी जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर थे । जैन धर्म की स्थापना त्रिषभदेव ने की थी । महावीर स्वामी ने इसके विकास मे अहम योगदान दिया था । इन्होने जैन धर्म को पुर्ण तपोमय बना दिया । महावीर स्वामी का प्रारंभिक जीवन -- वैशाली राज्य की सीमा पर गण्डकी नदी के तट पर क्षत्रियकुण्डनपुर नगर के राजा सिध्दार्थ और माता त्रिशला के यहा महावीर स्वामी का जन्म हुआ था । संन्यास से पुर्व इनका नाम वर्धमान था । इनके जन्म से पहले इनकी माता को चौदह विचित्र सपने आये थे । चैत्र मास की शुक्ला त्रयोदशी को सोमवार के उपाकाल मे महावीर स्वामी ने शिशु वर्धमान के नामरूप जन्म लिया । शिशु का का रंग तपे सोने के समान था । शान्ति और कान्ति से शरीर शोभित और गठीत था । माता-पिता ने बड़ी सावधानी से उनका पालन-पोषण किया । रानी त्रिशला अत्यंत गुणवती व सुंदर थी । सिध्दार्थ...