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शेषनाग झील की कथा (Legend of Sheshnag Lake)


मित्रो आज हम बात करेंगे शेषनाग झील के बारे में  | यह झील बहुत ही पवित्र झील है हिन्दू धर्म के धार्मिक ग्रंथो में इस झील का वर्णन मिलता है | इस झील में आये दिन अकल्पनीय घटनाये होती रहती है | यहाँ के स्थानीय निवासी बताते है की इस झील में भागवान शेषनाग दिखाई देते है | देखा जाये तो इस झील की आकृति नाग के समान ही है | 

जो भी श्रद्वालु बाबा अमरनाथ के दर्शन जाता है वह आते समय इस शेषनाग झील के दर्शन भी करता है | कहा जाता है की जो व्यक्ति सच्चे मन से आता है उसे इस झील में भगवान शेषनाग दिखाई देते है | ऐसा माना जाता है की 24 घंटो के अंदर एक बार शेषनाग जल से बाहर निकलते है | वो नसीब वाला ही होता है जो उनके दर्शन करता है |  

शेषनाग झील जम्मू-कश्मीर के पहलगाम के समीप स्थित है | यह झील ३५६० मीटर की उच्चाई पर है | 





शेषनाग झील की पौराणिक कथा -

एक बार माँ पार्वती ने शिवजी से सृष्टि के सिध्दांत और अमर होने की कथा सुनाने का आग्रह किया तब शिवजी माता पार्वती को कथा सुनाने ले जा रहे थे | शिवजी ने अतिगोपनीय विषय जान कर साँपो को अनंतनाग में त्यागा , नंदी को पहलगाम में , चन्द्रमा को चंदनवाड़ी में , और अंतिम में शेषनाग को इसी झील में त्यागा | जिस कारण इस झील का नाम शेषनाग पड़ा | 

यह स्थल हिन्दुओ का धार्मिक स्थल है | शेषनाग को भगवन विष्णु का रक्षक कहा जाता है | विष्णु भगवान् शयनावस्था में इसी शेषनाग पर सोये हुए है | हिन्दू धर्म में शेषनाग की पूजा की जाती है | ऐसा कहा जाता है पूरी पृथ्वी इन्ही के फनो ऊपर टीकी है | 



शेषनाग झील की यात्रा कब करनी चाहिए 

शेषनाग यात्रा करने का सबसे अच्छा समय जून - सितम्बर  है | क्युकी सितम्बर के बाद बर्फ़बारी शुरू हो जाती है | रस्ते रोक दिए जाते है | 



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