Skip to main content

अवधूत बाबा शिवानंद जीवन परिचय(Biography of avdhoot baba shivanand )

अवधूत बाबा  शिवानंद भारत के धार्मिक और आध्यांत्मिक गुरु है | इनका एक गैर लाभकारी सगठन "शिवयोग " है | जो मानव समाज को ध्यान और अध्यात्म का पाठ पढ़ाता है | भारत की पौराणिक परंपरा को प्रचार  करना है | भारत के मुकाबले बाहरी देशो के लोग इससे ज्यादा जुड़े हुए है |




अवधूत बाबा शिवानंद जीवन परिचय(avdhoot baba shivanand)


अवधूत शिवानंद जी का जन्म 26 मार्च 1956 में हुआ था | यह मूलतः दिल्ली के रहने वाले है लेकिन इनकी शिक्षा-दीक्षा राजस्थान में ही हुई | बचपन से ही इनका मन अध्यात्म और ईश्वर खोज में था | यह अन्य बालको से अलग थे जो अपना पूरा समय खेल-कूद और अध्ययन में लगाते थे |

बाल्यकाल में उनका संपर्क हिमालय के सिद्ध 108 जगन्नाथ जी से हुआ | जगन्नाथ ने इनको अध्यात्म पथ पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया | इन्होने अवधूत जी को कई ध्यान और योग विधिया सिखाई | इसके बाद इन्होने अपने शिष्य को इस ज्ञान का प्रसार - प्रचार करने का आदेश दिया |


गुरु आदेश मानकर इन्होने अपना पूरा जीवन ईश्वर को समर्पित कर दिया | इन्होने भारत के धार्मिक स्थलों की यात्रा की और वहा ध्यान-साधना का अभ्यास किया |


शिवयोग की स्थापना और प्रचार (Establishment and promotion of Shiv Yoga)-


1995 में "शिवयोग फाउंडेशन " की स्थापना दिल्ली में की गयी | शिवयोग फॉउण्डेशन द्वारा ध्यान और अध्यात्म का प्रचार किया जा रहा है | शिवयोग फाउंडेशन के कार्यक्रम आज पुरे विश्व में किये जाते है | शिवयोग फाउंडेशन का मानना है की सन्यास लिए बिना  भी ध्यान और समाधी के परमपद को प्रपात किया जा सकता है |

अवधूत शिवानंद जी को 'Indian Hilling Father" के नाम से भी जाना जाता है | अवधूत जी सार्वजनिक प्रवचन भी करते है | T.V पर भी प्रवचन देते है - ASHTHA TV , SANSKAR TV , ADHYATAM TV | अवधूत शिवानंद जी के अनुनायी पुरे विश्व में है |

2016 में मुंबई के D.Y PATIL UNIVERSITY के कुलपति ने इन्हे आधुनिक अध्यात्म में बढ़ावा देने के उपलक्ष में डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की थी |



SHIVYOG FOUNDATION







NOTE → आपके पास Baba Shivanand के बारे में और Information हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इस अपडेट करते रहेंगे।



Comments

Popular posts from this blog

करमैती बाई का जीवन परिचय ( Karmaiti Bai Biography In Hindi )

करमैती बाई - 

नाथ संप्रदाय और सिद्ध योगी गुरु गोरखनाथ (Guru Gorkhnath And Nath Sampraday)

गुरु गोरखनाथ भारत के सिद्ध महात्माओ में से एक है | भारत में नाथ संप्रदाय अपनी एक अलग पहचान रखता है | इस संप्रदाय में बड़े बड़े सिद्ध महात्मा हुए जैसे -गोरखनाथ , मत्स्येन्द्र नाथ   गोगाजी , रामदेवजी , राजा भर्तहरि , राजा गोपीचंद,कनीफनाथ,जालंधर , रेवणनाथ , जैसे अनेको सिद्ध हुए | नाथ संप्रदाय में कुल 12 पंथ होते है | इस पंथ में दीक्षा लेने वाले साधक को कठिन तपस्या व गुरु सेवा के बाद गुरु अपनी स्वैच्छा से साधक को दीक्षा देता है | गुरु गोरख नाथ के गुरु मत्स्येन्द्र नाथ को मन जाता है | नाथ संप्रदाय भेदभाव का विरोधी है | नाथ संप्रदाय में कोई भी साधक सन्यास ले सकता है चाहे वो किसी भी वर्ण का हो | नाथ संप्रदाय में कुल १२ पंथ है | इन पंथो की जानकारी में नीचे दे रहा हूँ | सत्यनाथ पंथ   धर्मनाथ पंथ  रामनाथ पंथ   लक्ष्मणनाथ पंथ  कंथड़ पंथ  कपिलानी पंथ  वैराग्य पंथ  मन्नाथ पंथ  आई पंथ  पागल पंथ  ध्वजनाथ पंथ  गंगा नाथ   ऐसा माना जाता है की नाथ संप्रदाय के प्रथम प्रवर्तक स्वयं आदिनाथ ( शिव )...

महावीर स्वामी का जीवन परिचय और उपदेश ( Biography Of Mahavir Swami and Updesh )

महावीर स्वामी का जीवन परिचय और उपदेश (Biography Of Mahavir Swami )-- महावीर स्वामी विक्रम संवत के पाँच सौ वर्ष पहले के भारत की बहुत बड़ी ऐतिहासिक आवश्यकता थे । इन्होनें सुख-दुख मे बंधे जीव के लिए शाश्वत दिव्य शान्ति और परम् मोक्ष का विधान किया । महावीर स्वामी जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर थे । जैन धर्म की स्थापना त्रिषभदेव ने की थी । महावीर स्वामी ने इसके विकास मे अहम योगदान दिया था । इन्होने जैन धर्म को पुर्ण तपोमय बना दिया । महावीर स्वामी का प्रारंभिक जीवन -- वैशाली राज्य की सीमा पर गण्डकी नदी के तट पर क्षत्रियकुण्डनपुर नगर के राजा सिध्दार्थ और माता त्रिशला के यहा महावीर स्वामी का जन्म हुआ था । संन्यास से पुर्व इनका नाम वर्धमान था । इनके जन्म से पहले इनकी माता को चौदह विचित्र सपने आये थे । चैत्र मास की शुक्ला त्रयोदशी को सोमवार के उपाकाल मे महावीर स्वामी ने शिशु वर्धमान के नामरूप जन्म लिया । शिशु का का रंग तपे सोने के समान था । शान्ति और कान्ति से शरीर शोभित और गठीत था । माता-पिता ने बड़ी सावधानी से उनका पालन-पोषण किया । रानी त्रिशला अत्यंत गुणवती व सुंदर थी । सिध्दार्थ...