Inspirational story in hindi -
सुजान सिंह के एक पहलवान थे | वह हमारे देश के बड़े जबरदस्त पहलवान थे | सैकड़ो दंगलों में बाज़ी मर चुके थे | देश का कोई पहलवान ऐसा नहीं था जिसे सुजान सिंह ने नहीं पछाड़ा हो | लेकिन सुजान सिंह शरीर और कदकाठी से अन्य पहलवानो के सामने कुछ भी नहीं थे | उनके मुकाबले में बड़े बड़े पहलवान आये जो हाथी के समान डीलडौलवाले और गेंडे की तरह ताकतवर नज़र आते थे तो लोग कहते की सुजान सिंह जरा सा आदमी और इसके मुक़ाबले में रुस्तम जैसे पहलवान ! मगर जब लंगोट कसकर बजरंगबली की आवाज़ के साथ सुजान सिंह अखाड़े में कूदते और अपने से दुगुने - तिगुने शरीर वाले पहलवानो को कमर में हाथ डाल कर कांधे में उठा लेते और इतनी जोर से पटकते की उनकी हड्डी हड्डी बोल जाती थी |
अलवर के महाराजा ने सुजान सिंह को"रुस्तमे हिन्द " का ख़िताब दिया था और रोज़ उनको एक घड़ा दूध , आधा सेर बादाम , सेर भर घी दिया गया |
एक दिन एक पहनवान सुजान सिंह के पास आया | वह दिखने में बड़ा ही विशालकाय और हठा - कठा था | वह अर्जुन सिंह के पास आकर बोला ' मेरा नाम अर्जुन सिंह हैं में आपके कुश्ती सिखने आया हु | एक वर्ष तक सुजान सिंह ने उस पहलवान को कुश्ती में महारत कर दिया |
एक साल बाद सुजान सिंह ने महाराजा से कहा ' अन्नदाता !मैंने एक पहलवान तैयार किया है | मैं चाहता हु की आप उसका खेल देखे | महाराजा ने मंजूरी दे दी |
दूसरे दिन इलाके में सारे पहलवान इकठ्टा हो गए | अखाड़े की खुदाई हुई नई मिट्टी डाली गयी | महाराजा और अन्य सरदारों के लिए कुर्सियां लगाई गई | अर्जुन सिंह को महाराजा के सामने पेश किया गया | महाराजा ने देखा आदमी के रूप में मनो हठी खड़ा हो | अर्जुन सिंह ने महाराजा को सलामी दी |
अर्जुन सिंह ने सभी पहलवानो को ललकारा तभी सूजान सिंह के पहले पत्ते का पहलवान गया जिसे अर्जुन सिंह ने हरा दिया | तभी महाराजा ने कहा " वाह वाह क्या पहलवान है | जिससे अर्जुन सिंह का जोश दुगुना हो गया | फिर दूसरे पत्ते का पहलवान आया उसे भी अर्जुन सिंह ने पछाड़ डाला | फिर लगातार पांच पहलवानो को हराया जिससे महाराजा ने उसके गल्ले में हीरो का हर डाला | अब अर्जुन सिंह घमंड आने लग गया |
तभी महाराजा ने कहा ' अरे सुजान सिंह यह तुम्हारा पहलवान तो बड़ा जबरदस्त हैं | तभी अर्जुन सिंह ने सीना तानकर कर बोले ' अन्नदाता ! यह तो परमात्मा की देन है , सुजान सिंह भला मुझे क्या सिखाएँगे ! में तो उनसे भी दो दो हाथ करने तो तैयार हूँ | महाराजा ने कहा - आज तुम थक गए हो कल सुबह तरोताजा होकर कल तुम्हारा और सुजान सिंह मुकाक्ला होगा |
सुजान सिंह बेचारे मन में सोचने लगे "साल भर में क्या क्या नहीं सिखाया , सरे दाव पेंच सिखलाए ! आज उन सब पर पानी फिर गया |
रातो-रात यह बात बिजली की तरह सारे शहर में फ़ैल गयी की कल सुजान सिंह अपने चेले अर्जुन सिंह से लड़ेंगे | अभी सूरज भी उगना था की हज़ारो लोग महाराजा के महल के आगे मलयुद्ध देखने आ गए | सुबह 8 बजे महाराजा साहब भी उठ गए कुश्ती देखने आ पहुंचे |
कुश्ती शुरू हो गयी | अर्जुन सिंह ने सुजान सिंह को आवाह्न किया तभी सूजान सिंह बजरंगबली की जय बोल कर अर्जुन सिंह पर टूट पड़े | सुजान सिंह जमीन पर गिर पड़े अर्जुन सिंह ने उन्हें कमर से उठा कर पटकने की चेष्टा की | मगर उन्होंने जमीन को जोर से पकड़ा और वे टस से मस नहीं हुए | अर्जुन सिंह ने तरह तरह के दाव -पेंच खेले लेकिन वो सुजान सिंह से नहीं जित पाया | आखिरकार अर्जुन सिंह हाफ गया | अब बारी सुजान सिंह की थी उन्होंने अर्जुन सिंह को कुश्ती से सभी दाव सिखाये लेकिन एक दाव नहीं सिखाया | शायद यह दाव उन्होंने इसी दिन के लिए संभल कर रखा था | आखिर में सुजान सिंह ने अर्जुन को एक अँगड़ा मारा अर्जुन मनो सूखे वृक्ष की तरह गिर गया |
महाराजा ने सुजान सिंह को दौड़ कर गले लगा लिया | दर्शको ने फूल बरसाए | अर्जुन सिंह ने सुजान सिंह के पैर पकड़े और अपनी करनी की माफ़ी मांगी |
सुजान सिंह ने गले लगाकर कहा " बेटा इस सिख को हमेशा याद रखो की साँप पकड़ने वाला हमेशा साँप के काटे का मंत्र अपने पास रखता हैं "

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